Sun 15 Apr 2007
आईठहाथ उठायें हम à¤à¥€
हम जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रसà¥à¤®-à¤-दà¥à¤† याद नहीं
हम जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सोज़-à¤-मोहबà¥à¤¬à¤¤ के सिवा
कोई बà¥à¤¤, कोई खà¥à¤¦à¤¾ याद नहीं
आईठअरà¥à¥› गà¥à¥›à¤°à¥‡à¤‚ कि निगार-à¤-हसà¥à¤¤à¥€
ज़हर-à¤-इमरोज़ में शीरीनी-à¤-फ़रà¥à¤¦à¤¾à¤‚ à¤à¤° दे
वो जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तबे गरांबारी-à¤-अयà¥à¤¯à¤¾à¤® नहीं
उनकी पलकों पे शब-ओ-रोज़ को हलà¥à¤•ा कर दे
जिनकी आंखों को रà¥à¤–-à¤-सà¥à¤¬à¤¹ का यारा à¤à¥€ नहीं
उनकी रातों में कोई शमा मà¥à¤¨à¤µà¥à¤µà¤° कर दे
जिनके कदमों को किसी राह का सहारा à¤à¥€ नहीं
उनकी नज़रों पे कोई राह उजागर कर दे
जिनका दीन पैरवे-à¤-कज़à¥à¤¬à¥‹-रिया है उनको
हिमà¥à¤®à¤¤-à¤-कà¥à¥žà¥à¤° मिले, जà¥à¤°à¥à¤°à¤¤-à¤-तहकीक मिले
जिनके सर मà¥à¤¨à¥à¤¤à¤¾à¥›à¤¿à¤°-à¤-तेग-à¤-जफ़ा हैं उनको
दसà¥à¤¤-à¤-कातिल को à¤à¤Ÿà¤• देने की तौफ़ीक मिले
इशà¥à¤• का सरà¥à¤°-à¤-निहां जान-तपां है जिस से
आज इकरार करें और तपिश मिट जाये
हरà¥à¥ž-à¤-हक दिल में खटकता है जो कांटे की तरह
आज इज़हार करें ओर खलिश मिट जाये ।